Tuesday, 17 September 2019

खाड़ी में बढ़ते तनाव से भारत में तेल संकट गहराने के आसार


सऊदी में ड्रोन हमले से कच्चे तेल की कीमत बढ़ कर हुई 71.95 डॉलर प्रति बैरल;
भारत में तेल की कीमतों में भारी बढ़त की आशंका;
ट्रम्प ने ईरान को ज़िम्मेदार मानते हुए दिए सैन्य कार्यवाही के संकेत;

आशुतोष
17 सितम्बर । नई दिल्ली

सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल उत्पादन कम्पनी, अरामको के संयंत्र पर शनिवार को हुए ड्रोन हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 20% बढ़ कर अब 71.95 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ना शुरू हो चुका है। सोमवार को रुपये की कीमत 71.60 प्रति डॉलर हो गई वहीं, सेंसेक्स भी 261.68 अंक लुढ़क कर 37,123.31 अंक पर बन्द हुआ।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत को देखते हुए भारतीय तेल कम्पनियों ने भी पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोत्तरी के संकेत दिए हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के निदेशक एमके खुराना ने एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में बताया कि यदि इसी तरह कच्चे तेल की कीमत बढ़ती रही तो भारत में तेल की कीमतों में भारी बढ़त हो सकती है। गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है जो अपनी 80% तेल की और 18% प्राकृतिक गैस की आपूर्ति आयात से के माध्यम से करता है, जिसमें से 20% वह सऊदी अरब से आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल का इज़ाफा होता है तो भारत पर सालाना रूप से 10,700 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। स्थितियों ने एक बार फिर सरकार द्वारा तेल की कीमत तय करने की नीति लागू करने की बहस को आगे कर दिया है।
हालाँकि भारत सरकार के कुछ अधिकारियों ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर यह बताया है कि वर्तमान स्थितियों के बावजूद सऊदी अरामको, अन्य बन्दरगाहों से भारत को अनुबन्ध के अनुसार तेल की आपूर्ति करेगा। भारत पेट्रोलियम के निदेशक आर रामचन्द्रन ने बताया कि अरामको ने एक दिन पहले ही करार की गई कच्चे तेल से भरे जहाज़ को भारत की ओर रवाना कर दिया है, साथ ही 20 लाख टन कच्चे तेल के आयात के लिए अग्रिम करार भी कर लिया है।

आरबीआई गवर्नर ने जताई चिंता
आरबीआई गवर्नर शशिकांता दास ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में संकेत दिए कि तेल कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण भारत में चालू खाता एवं राजकोषीय घाटे को धक्का लग सकता है। उन्होंने कहा, "हम स्थितियों पर नज़र बनाये हुए हैं और यदि यह संकट बना रहता है तो यह भारत के राजकोषीय घाटे को असर करेगा। यहाँ पर यह देखना आवश्यक होगा कि भारत कितनी जल्दी तेल आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों के लिए कदम उठाता है।"

क्या है यह पूरा मामला
सऊदी अरब में स्थित अरामको तेल कम्पनी के अकबैक संयंत्र पर शनिवार तड़के एक ड्रोन द्वारा हमला किया गया था जिससे संयंत्र के महत्वपूर्ण हिस्सों को क्षति पहुँची है। हमले से सऊदी अरब द्वारा अन्य देशों को तेल आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत, रूस, चीन समेत कई देशों ने इस हमले की निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि "भारत 14 सितम्बर को अकबैक तेल संयंत्र व खुरैस तेल कूपों पर हुए हमले की निंदा करता है। हम आतंकवाद के हर स्वरूप का विरोध करने के लिए कटिबद्ध हैं।"

अमरीका ने ईरान को ठहराया दोषी
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉमपियो ने ईरान को हमले का दोषी ठहराया है। वहीं इराक और उसके समर्थकों ने भी हमले में ईरानी हथियारों के प्रयोग की बात कहते हुए ईरान को ही ज़िम्मेदार बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्वीट में सैन्य कार्यवाही के संकेत देते हुए कहा कि अमरीका तेल के लिए पूरी तरह से आत्मनिर्भर है आई और उसे खाड़ी से तेल की कोई आवश्यकता नहीं है लेकिन अमेरिका पूरी तरह से अपने साथी देशों की मदद करेगा। इस पर रूस, यूरोपीय संघ और चीन ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने को कहा है।

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